लापरवाही: व्हीलचेयर व स्ट्रेचर तक नहीं मिल रहे, मरीज घिसट कर पहुंच रहे इलाज कराने

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज का हाल इतना बुरा है कि यहां पर मरीज रिक्शे पर लेटे मिलेंगे और कुछ तो पेड़ के नीचे ही इलाज का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। यहां अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को इलाज के लिए दर-बदर भटकना पड़ रहा है।मरीज़ों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो रहे हैं ।मरीज ऐसे ही परेशान है और इन सब के चलते उनको और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा। यहां तक के चलने-फिरने से लाचार मरीजों को उनके परिजन गोद में लाते ले जाते हैं या उनको खुद ही धीरे-धीरे जमीन से घिसटते हुए जाना पड़ता है।

देश में फैले कोरोना वायरस के चलते एसएन मेडिकल कॉलेज में डिजिटल और ट्रायल ओपीडी चल रही है। डिजिटल ओपीडी पुरानी इमारत में चल रही है जिसकी जानकारी न होने के कारण कई मरीज यहां उपचार कराने के लिए पहुंच जाते हैं। यहां पर इनको एमजी रोड स्थित इमरजेंसी भेज दिया जाता है। इसके लिए उनको स्ट्रेचर व व्हीलचेयर तक नहीं मिलते, जिससे मरीजों को काफी दिक्कतें हो रहीं हैं।

इमरजेंसी में सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक मरीजों की संख्या अधिक रहती है। यहां भी वार्ड ब्वॉय का कोई अता पता नहीं रहता और व्हीलचेयर, स्ट्रेचर भी नहीं मिलते है। इससे फ्रेक्चर और चलने-फिरने में लाचार मरीजों को परेशानी हो रही है।
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि व्हीलचेयर-स्ट्रेचर की व्यवस्था है, वार्ड ब्वॉय को अपनी सुरक्षा करते हुए चलने-फिरने में लाचार मरीजों को ओपीडी तक पहुंचाने के निर्देश हैं, इनकी रिपोर्ट मांगता हूं।

यहां एक तरफ ताजगंज से आए सुरेश चंद के पैर में फ्रैक्चर हो गया है, डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने के बाद इनको रुटीन जांच के लिए बुलाया था। इनको स्ट्रेचर नहीं मिला है और इमरजेंसी पर घंटों इंतजार करते रहे फिर भी वार्ड ब्वॉय तक नहीं आया।

वहीं दूसरी तरफ शमसाबाद की महिला के डेढ़ महीने के बच्चे का पेट फूल गया, इसको दिखाने के लिए बाल रोग विभाग आए थे, यहां से उन्हें इमरजेंसी जाने को कहा। यहां भी सुनवाई न होने पर वह काफी देर तक पेड़ के नीचे बैठे रहे। वहीं कई मरीज एंबुलेंस न मिलने के कारण रेहड़ी आदि पर आ जा रहे हैं।

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