शिया समुदाय के मौलाना यासूब अब्बास ने जन्नत उल बक़ी के विध्वंस बरसी के मौक़े पर सऊदी अरब शासकों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

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लखनऊ। 1926 में सऊदी अरब के पवित्र मदीना शहर में पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद की बेटी हज़रत फ़ातिमा के विध्वंस किये गए मज़ार(रौज़े) के पुनः निर्माण कराने के माँग करते हुए तथा सऊदी सरकार के राज-तंत्र को इस्लाम विरोधी बताते हुए मौलाना यासूब अब्बास द्वारा प्रदर्शन किया गया।
लॉकडाउन के चलते मौलाना यासूब अब्बास के द्वारा शहीद स्मारक पर किये जाने वाले प्रदर्शन को पुराने लखनऊ स्थित अवध पॉइन्ट पर किया गया।
प्रदर्शन के दौरान भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र जारी दिशा-निदेश का पूर्णता पालन किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़ों में सऊदी अरब सरकार के विरुद्ध नारे लगाए और संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र भेजा। पत्र में अपील की गई है कि संयुक्त राष्ट्र सऊदी अरब सरकार शासन पर जन्नत उल बक़ी का पुनःनिर्माण बनाने का दबाव बनाए।
इस मौक़े पर मौलाना यासूब अब्बास ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जन्नत उल बक़ी में हज़रत फ़ातिमा की क़ब्र के अलावा शिया समुदाय के चार इमामों और हज़रत अब्बास की वालिदा (माता) हज़रत उम्मुल-बनीन की क़ब्रें भी हैं।
जन्नत उल बक़ी में इमाम हसन, इमाम सज्जाद, इमाम मोहम्मद बक़ीर और इमाम जाफ़र अल सादिक़ की क़ब्रें हैं।साउदी अरब में आले-सऊद का शासन शुरू होते ही इस क़ब्रों पर बना रौज़ा विध्वंस कर दिया गया था।
सऊद ,पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के लाए हुए इस्लाम के नाम पर शासन करते हैं और उन्ही की बेटी के मज़ार को 1926 में विध्वंस कर दिया। मौलना ने कहा कि साउदी शासन इस्लाम विरोधी है और साम्राज्यवादी ताक़तें उसको अपने इशारे पर चलाती है।

मौलाना यासूब अब्बास के भाषण के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथो में साउदी शासन विरोधी और जन्नत उल बक़ी के पुनःनिर्माण की माँग के प्लैकर्ड पकड़कर आले-सऊद के शासन के दमन के ख़िलाफ़ नारे लगाए।
प्रदर्शन की शुरुआत हज़रत फ़ातिमा को श्रधांजलि देते हुए एजाज़ ज़ैदी और नय्यार मजीदी द्वारा नौहा (मातम) पढ़ कर किया गया। इसके बाद मौलाना एजाज़ अतहर ने मजलिस पढ़ी और कहा की हज़रत फ़ातिमा पर उनकी ज़िन्दगी में भी ज़ुल्म हुए और शहादत के बाद भी उन पर ज़ुल्म किया जा रहा है। मौलाना एजाज़ अतहर ने कहा की हज़रत फ़ातिमा के घर में आग लगा कर उनको शहीद किया गया और उनका मज़ार को भी विध्वंस कर दिया गया।

मजलिस के बाद प्रदर्शन को समाप्त करते हुए प्रदर्शनकारियों ने मातम किया और मौलाना यासूब अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्नत उल बक़ी के पुनःनिर्माण कार्य के लिए एक पत्र भी भेजा। जिसमें भारत सरकार से अपील की गई है कि वह भी साउदी अरब शासन पर हज़रत फ़ातिमा के मज़ार के पुनःनिर्माण के लिए दबाव बनाए।

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