बड़ी खबर : हाईकोर्ट ने कहा, लाउडस्पीकर से अजान पर रोक सही

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिद से आज़ान के मामले में कहा है कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक हिस्सा नहीं है। केवल अजान इस्लाम का धार्मिक भाग है । इंसान की आवाज में मस्जिदों से आजान दी जा सकती है । अदालत ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण मुक्त नींद का अधिकार जीवन के मूल अधिकारों का हिस्सा है , किसी को भी अपने मूल अधिकारों के लिए दूसरे के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है । शुक्रवार को कोर्ट ने साफ कर दिया कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक भाग नहीं है । इसलिए लाउडस्पीकर से आजान पर रोक सही है । यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता व न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर से आधार पर रोक के खिलाफ गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी व फर्रुखाबाद के सैयद मोहम्मद फैसल की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है ।

जब लाउडस्पीकर नहीं था तब भी अजान होती थी : कोर्ट

अदालत ने कहा कि जब लाउडस्पीकर नहीं था, तब भी अजान होती थी। इसलिए ये नहीं कह सकते कि लाउडस्पीकर से अजान रोकना संविधान के अनुच्छेद 25 के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है । अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 स्वस्थ जीवन का अधिकार देती है । वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी को भी दूसरे को जबरन सुनाने का अधिकार नहीं देती है । एक निश्चित ध्वनि से अधिक तेज आवाज बिना अनुमति बजाने की छूट नहीं है। रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक लाउडस्पीकर की आवाज पर रोक का कानून है । अदालत के फैसले हैं । इस पर नियंत्रण का सरकार को अधिकार है । अदालत ने मुख्य सचिव को सभी जिलाधिकारियों से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।

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