ज़िंदगी ,कोरोना और डर ! लखनऊवासी ये जरूर पढ़ें…

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यह आर्टिकल खास तौर पर मैं लखनऊवासियों के लिए लिख रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आप इसको पूरा जरूर पढ़ेंगे !

मालूम है आप सब घर में लॉकडाउन है । हर तरफ़ से बुरी खबर सुन- सुन कर थक भी चुके है । नवाबों के शहर के सभी नवाब अपने घरों में लॉकडाउन है और अपने शहर की स्तिथि सुधरने की इंतजार में है । ये शहर लखनऊ है और इस शहर ने रुकना नहीं सीखा है। इस कोरोना वायरस ने लखनऊ की गति जरूर रोकी है और मुझे विश्वास है लखनऊ फिर दौड़ेगा।

पूरे दिन हम आंकड़े देखते रहते है । कहा पर कितने मरीज है , कुल कितने मरीज हो गए यहीं देखते रहते है । पर लखनऊ वालों के लिए इन्हीं आकंड़ों में एक अच्छी बात छुपी हुई है , जो सच में सुकून पहुंचाती है ।

लखनऊ में कोरोना मरीज़ों का कुल आंकड़ा 276 है । सिर्फ एक शहर का ये आंकड़ा आपकों बड़ा लग सकता है । पर चलिए एक आंकड़े पर और नज़र डालते है । वो आंकड़ा हर लखनऊवासियों को जरूर सुकून पहुंचाएगा और वो आंकड़ा है लखनऊ में मरीज़ों का ठीक होने का । आपकों बता दूं कि अभी तक 211 मरीज़ ठीक होकर अपने घर लौट चुके है और अभी लखनऊ में कोरोना के एक्टिव मरीज़ बस 64 है जिनपर इलाज चल रहा है । आगे जरूर पढियेगा क्योंकि अब सबसे महत्वपूर्ण बात आपसे साझा करने जा रहा हूँ ।

276 में 211 मरीज़ों को लखनऊ के डॉक्टर्स ने ठीक कर दिया। बस अब बचे है 64 । आप सबसे निवेदन है कि ये बात लोगों को जरूर समझाए की लखनऊ इस चीज़ में अच्छा कर रहा है क्योंकि इस कोरोना ने हम सबकों को इतना डरा दिया है कि हमारे सामने कोई इंसान जो कि एक बार को हमारा पड़ोसी हो या हमारे मौहल्ले का हो अगर वो किसी भी बीमारी से जूझ रहा है और उसे मदद की तुरंत जरूरत है तो हम सब कोरोना से इतने भयभीत है कि उसकी सहायता करने नहीं जाते ।

कल ही मेरे सामने ऐसी ही एक घटना घटित हुई जिसने मुझे आज ये लिखने और लोगों तक ये बात पहुंचाने के लिए विवश कर दिया । मैं आपकों एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ । इस कोरोना महामारी आने से पहले लखनऊ के सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट वो खचाखच भरा रहता था । पर लॉकडाउन लगने के बाद जिन मरीज़ों का रेगुलर चेकउप चलता था वो उन्हें नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से लोग बाकी बीमारी (बीपी, सुगर , हार्ट की समस्या ,आदि) से परेशान हो रहें है और जब वो हमारी तरफ मदद के लिए देखते है तो कोरोना के भय की वजह से हम खुद को रोक लेते है । वो मदद आर्थिक हो सकती है या फिर वो मदद ola-uber न मिलने पर मौके पर अपनी गाड़ी उपलब्ध कराने की । ऐसी ही तमाम मदद जो आपके द्वारा संभव हो और आप न कर रहें हो।

मैं यहीं कहना चाहता हूं ये बिलकुल गलत है । इस कोरोना ने हम सबकों यहीं सिखाया है कि जिस बनावटी दुनिया में हम सब ज़िंदगी जी रहें थे असल में वो सब ज़िंदगी की असल प्राथमिकता थी ही नही । इस कोरोना ने हमें ये बताया और समझाया है कि हमारा परिवार , हमारे आस पास के लोग उनसे बातें उनसे रिश्ते ही ज़िंदगी की असल जरूरत है।

मैं यहीं कहना चाहता हूं लखनऊ इस कोरोना से लड़ाई बहुत अच्छे से लड़ रहा है । अगर आपके मौहल्ले में किसी इंसान को आपकी जरूरत हो या फिर अचानक कोई बीमार हो जाता है किसी वजह से तो उसकी जो संभव मदद हो सकती है वो जरूर करें ।

क्योंकि इस कोरोना ने हम सबको अगर सबसे अच्छा कोई पाठ पढ़ाया है तो वो पाठ इंसानियत का है । अगर मेरी बातों से आप भी सहमत है तो अपने सभी परिवार वालों तक और हर एक लखनऊवासियों तक ये बात जरूर पहुचाएं।

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