भावुक हुई शहीद संतोष बाबू की पत्नी , पीएम मोदी से कही ये बात

लद्दाख के गलवां घाटी में 15 जून को हुई खूनी झड़प में भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर सहित 20 जवानों ने देश के नाम अपनी शहादत दी.

इन जाबाजों की शहादत के बाद हर हिंदुस्तानी का खून गुस्से से उबल रहा था ,और सभी हिंदुस्तानी चीन से इन जवानों की शहादत का बदला लेना चाहता था.ऐसे में जवानो का हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रवार की सुबह पीएम मोदी अचानक लेह चले गए और वहां पर प्रधानमंत्री ने जवानों को ये बताया कि वो अकेले नहीं है पूरा भारत उनके साथ खड़ा है.

प्रधानमंत्री के इस लेह दौरे से न सिर्फ भारतीय सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन तक भी कड़ा संदेश पहुंचेगा. पीएम के लेह के इस दौरे पर शहीद कर्नल संतोष बाबू की पत्नी ने भी अपनी प्रतिक्रिया एक विनती के ज़रिए दी.

एक निजी समाचार चैनल से बात करते हुए शहीद संतोष बाबू की पत्नी ने कहा कि उनके पति का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए. मोदीजी के जाने से सेना को बल मिलेगा. भारतीय जवान वीर-बहादुर हैं. हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. मैं मोदीजी को कहना चाहूंगी कि हमें हर हाल में जीत कर ही आना है.

गौरतलब है कि 15 जून को श्योक और गलवां नदी के संगम स्थल के पास 3 इंफेंट्री डिवीजन कमांडर व अन्य अफसर मौजूद थे. दोनों देशों में बातचीत चल रही थी. 16 बिहार रेजिमेंट से कहा गया कि वह सुनिश्चित करें कि समझौते के तहत चीन के सैनिक अपनी पोस्ट हटा लें. इसके लिए चीन की ऑब्जरवेशन पोस्ट पर जाकर भारतीय सैनिकों ने उनको तंबू हटाने की बात कही. उस समय वहां पर चीन के दर्जन भर सैनिक मौजूद थे.

भारतीय सैनिकों के पोस्ट हटाने की बात को चीनी सैनिकों ने मानने से इंकार कर दिया. जिसके बाद बिहार रेजिमेंट की टुकड़ी लौट आई.
इसके बाद कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में 50 सैनिकों की टुकड़ी मौके पर पहुंची और चीन से पोस्ट हटाने की बात फिर से कही, लेकिन तब तक चीन के करीबन 350 सैनिक हथियारों से लैस होकर भारतीय सैनिकों पर हमले की तैयार कर चुके थे. बिहार रेजिमेंट के जवानों के पहुंचते ही पहाड़ से पत्थर और सामने से चीनी सैनिकों ने कंटीले तार और कील लगे डंडों और रॉड से हमला कर दिया.

पहला वार हवलदार पलनी पर हुआ. कर्नल संतोष बाबू भी प्रहार से गिर पड़े. इतने में करीब 50 और भारतीय सैनिकों ने मौके पर पहुंचकर चीनी सैनिकों पर जबरदस्त जवाबी हमला किया. इसी बीच बड़ी तादाद में चीनी सैनिक लहूलुहान होकर नीचे गिर चुके थे. तब तक इनमें से कई की मौत भी हो चुकी थी. बिहार रेजिमेंट की टुकड़ी ने चीन के तंबू उखाड़ कर पोस्ट ध्वस्त कर दी. इसके बाद दोनों तरफ के सीनियर अफसरों में बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ. सैन्य सूत्रों के मुताबिक 16 जून की सुबह चीनी सैनिकों के शव और घायल सैनिकों को भारतीय सेना की ओर से लौटाया गया.

बॉर्डर पर भारत और चीन के बीच इस संघर्ष के समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वहां जाने से पूरा देश हैरान हो गया. भारतीय जवानों का मनोबल बढ़ाने और ग्राउंड जीरो में हालात समझने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीडीएस बिपिन रावत और सेना प्रमुख नरवणे भी वहां मौजूद रहे।

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