चिंताजनक: देश के इन चार राज्यों में मिले कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीज, बढ़ रही सरकार की चिंता

देश में मौजूदा समय में फैली कोरोना वायरस की दूसरी लहर धीरे- धीरे कमजोर पड़ ही रही है कि इस बीच एक चिंताजनक बात सामने आयी है.
आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट के तकरीबन 40 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद सरकार की चिंता बढ़ गई है.
गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस के इस वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ कन्सर्न’ करार दिया गया है. इसको आसान तरीके से समझिए तो ये वायरस चिंता बढ़ाने वाला है.
बुधवार को सरकारी सूत्रों की हवाले से कहा गया कि ये अभी भी वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट ही है. अभी तक देश में कुल चार राज्यों में इस वायरस के 40 मामले पाए गए हैं.
मालूम हो कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में मिले हैं.
जानलेवा कोरोना वायरस लगातार अपने रूप में परिवर्तन कर रहा है. कोरोना का भारत में जो डेल्टा वैरिएंट मिला था, ये डेल्टा प्लस उसी वैरिएंट से म्यूटेट होकर ही बना है.


तकनीकी तौर पर इसे B.1.617.2.1 या AY.1 नाम दिया गया है. डेल्टा वैरिएंट पहले भारत में मिला था, जिसके बाद इसने यूरोप के कई देशों में बहुत तबाही मचा दी है. लेकिन डेल्टा प्लस वैरिएंट इसी साल मार्च में यूरोप में मिला था, जो बाद में अन्य कई देशों में फैल गया. 
अभी कोरोना के एक और नए रूप के सामने आने पर ये सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इसपर वैक्सीन काम असरदार होगी या नहीं. फिलहाल ICMR की तरफ से ये पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन काम करेगी या नहीं करेगी. इसके लिए सैम्पल लिए जा चुके हैं और टेस्टिंग चल रही है. 
बताते चलें कि सरकार की तरफ से पहले बताया जा चुका है कि भारत में बन रही कोरोना की वैक्सीन हर वैरिएंट पर काम कर रही है. फिर चाहे वो कोविशील्ड हो या फिर कोवैक्सीन, लेकिन अब सामने आए नए डेल्टा प्लस वैरिएंट ने चिंता बढ़ाई है और ऐसे में रिसर्च कर इन दवाओं के प्रभाव की पुष्टि करना बहुत ही जरूरी हो जाता है.

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