Black fungus: जानिए क्या है ये घातक बीमारी, लक्षण और इससे बचाव के तरीके…

देश कोरोना का कहर बुरी तरह से झेल रहा है. यहां हर रोज तीन लाख से भी अधिक कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए जा रहे हैं. इसी बीच कई राज्यों में Covid-19 को मात दे चुके लोग ब्लैक फंगस नाम की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं.
आपको बता दें कि ब्लैक फंगस को म्यूकोरमाइकोसिस भी कहा जाता है. महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में इसके मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा हैं. इस बीमारी से पीड़ित कुछ लोग अपनी जान गवां रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को अपनी आंखे खो देनी पड़ रही है.
यही नहीं म्यूकोरमाइकोसिस के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों में अब स्पेशल वार्ड बनाकर इसकी चपेट में आए लोगों का इलाज किया जा रहा है.
आइए जानते हैं कि क्या है ये ब्लैक फंगस…
ब्लैक फंगस दुर्लभ लेकिन एक बेहद गंभीर बीमारी है. Covid-19 टास्क फोर्स के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये उन लोगों में आसानी से फैल जाता है, जो पहले से किसी ना किसी बीमारी से जूझ रहे हैं और जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. इन लोगों में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता कम होती है. हवा के माध्यम से ये फंगल इंफेक्शन साइनस और फेफड़ों को बड़ी सरलता से अपना शिकार बना लेता है. ब्लैक फंगस आमतौर पर कोरोना से ठीक होने वाले कुछ मरीजों में देखा जा रहा है. ये इंफेक्शन स्किन, फेफड़ों और दिमाग में फैलता है. अभी हाल ही में इस बीमारी को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की गई है.
डॉक्टर्स ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस के नए मामले अस्पताल में भर्ती या फिर ठीक हो चुके कोरोना के मरीजों में ज्यादा पाए जा रहे है. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत है, उन्हें इस बीमारी का खतरा कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ती के मुकाबले कम है.


क्या है म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण?
म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण में आंख-नाक में दर्द या लाल होना, बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून के साथ उल्टी होना शामिल हैं. एडवाइजरी के मुताबिक, कुछ लोगों में ये इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है. साइनस की समस्या, चेहरे के एक तरफ दर्द या सूजन, नाक के ऊपर काली पपड़ी होना, दांतों और जबड़ों का कमजोर होना, आंखों में दर्द के साथ धुंधला दिखाई देना, थ्रोम्बोसिस, त्वचा का घाव, सीने में दर्द और सांस संबंधी परेशानी होने पर ये इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
एक्सपर्ट्स ने बताया है कि नाक बंद होने के सारे लक्षण बैक्टीरियल नहीं होते हैं, खासतौर से कोरोना के मरीजों में. अगर आपको किसी भी तरह का संदेह है. तो तुरंत ही इस फंगल इंफेक्शन का पता लगाने वाली जांच करवाना बहुत ही ज्यादा जरूरी है.


क्या है म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज?
आमतौर पर म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज एंटीफंगल दवाओं से किया जा सकता है लेकिन इसके कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ जाती है.
डॉक्टर्स की माने तो म्यूकोरमाइकोसिस से बचाव के लिए डायबिटीज को कंट्रोल में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है. इसके अलावा इससे बचाव के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल कम करना होगा और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाएं खानी बंद करनी होंगी.
ब्लैक फंगस से बचने के लिए शरीर में सही हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए 4-6 हफ्ते तक इंट्रावेनस, एम्फोटेरिसिन बी और एंटीफंगल थेरेपी से इसका इलाज किया जा सकता है. 
मालूम हो कि टास्क फोर्स के एक्सपर्ट्स ने अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद कोरोना के मरीजों को हाइपरग्लाइसेमिया कंट्रोल करने और ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखने की सलाह दी है.
इसके अलावा टास्क फोर्स के एक्सपर्ट्स ने स्टेरॉयड देने के समय और इसके डोज पर भी ध्यान देने की बात कही है.
बता दें कि कोरोना के मरीज को म्यूकोरमाइकोसिस होने पर एक पूरी टीम मरीज का इलाज करती है. इसमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट, इंटेंसिविस्ट न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दांतों के डॉक्टर और सर्जन (मैक्सिलोफेशियल / प्लास्टिक) की जरूरत पड़ती है. इस बीमारी का इलाज भी काफी महंगा होता है. 
बताया जा रहा है कि म्यूकोरमाइकोसिस के इलाज में आवश्यक एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की एक डोज की कीमत 7000 है और इसके करीब चार से छह डोज लगते हैं.


क्या है म्यूकोरमाइकोसिस से बचाव के तरीके?
ध्यान रखें कि ये बीमारी बहुत कम लोगों को होती है. जिन लोगों में डायबिटीज बहुत ज्यादा बढ़ा होता है, ज्यादा स्टेरॉयड के इस्तेमाल वाले, ICU में ज्यादा दिनों तक रहने वाले और पहले से कई बीमारियों से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. इससे भयंकर बीमारी से बचने के लिए एक्सपर्ट्स मास्क पहनने की सलाह देते हैं. खेत या मिट्टी वाला कोई काम करते हैं तो जूते, लंबे बाजू के शर्ट, फुल पैंट और ग्लव्स पहन कर करें. इसके साथ ही साफ-सफाई का का पूरा ध्यान रखना चाहिए.
Covid-19 टास्क फोर्स की सदस्य डॉक्टर सोनम का कहना है कि स्टेरॉयड और सूजन कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर रहे कोरोना के मरीजों में म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा ज्यादा है. उन्होंने कहा कि फंगल इंफेक्शन स्टडी फोरम और क्लिनिकल संक्रामक रोग सोसायटी द्वारा की जा रही स्टडी में इसके और डेटा जुटाने का प्रयास किया जा रहा है.



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