क्‍या किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा? जानिए क्या कहते है राकेश टिकैत

दिल्ली के बार्डर पर चल रहा किसान आंदोलन क्या अब कमज़ोर पड़ रहा है? क्या किसान आंदोलन को लंबा खींचने के चक्कर में क्या इस आंदोलन में अपराध होने लगे हैं? उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में क्‍या रणनीति होगी? आज भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने इन सभी प्रश्नों को लेकर अपनी बात मीडिया के सामने रखी है.
इन प्रश्नों के एवज में राकेश टिकैत ने कहा, ‘हमारा आंदोलन चल रहा है लेकिन मीडिया ने दिखाना बंद कर दिया है. हम भी कोई बड़ा आह्वान नहीं कर रहे वर्ना मीडिया कहेगी कि हमें कोरोना की चिंता नहीं है.
किसान आंदोलन में आगे की रणनीति पर बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, ’26 जून को देश के सभी राज्यों में गवर्नर हाउस पर प्रदर्शन करेंगे. हम कोई मार्च नहीं निकालेंगे जो दिल्ली के अंदर रहने वाले किसान हैं वो ही इस प्रदर्शन में जाएंगे. अगली बार जब भी आह्वान होगा वो संसद घेराव का होगा.’
आपको बता दें कि आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्‍य, यूपी में अगले साल यानी कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस बारे में जब राकेश टिकैत से प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, ‘यूपी विधानसभा चुनाव में हम योगी सरकार का विरोध करेंगे. जैसे ही ये राजनीतिक रैलियाँ शुरू करेंगे, हम भी इनके ख़िलाफ़ पंचायतें करने लगेंगे.’


राकेश टिकैत ने स्‍पष्‍ट रूप से कहा, ‘मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा पर किसानों के मुद्दे को लेकर बीजेपी का विरोध करूंगा. हिंदू या मुसलमान नहीं, किसानों के मुद्दे पर चुनाव होगा. गेहूं की ख़रीद नहीं बढ़ी, गन्ना का रेट नहीं बढ़ा और न ही भुगतान हुआ है. गांव के लोग कोरोना से मरे हैं.’
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसान तकरीबन एक साल से आंदोलनरत हैं. किसान संगठन, तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग केंद्र सरकार से कर रहे हैं, वहीं, सरकार का कहना है कि वह जरूरत के मुताबिक इसमें सुधार करने के लिए तैयार है. बताते चलें कि केंद्र सरकार ने कई बार इस बात के संकेत दिए हैं कि किसान संगठनों को सिर्फ इन कानूनों को रद्द करने से इतर कानूनी बिंदुओं पर बात करनी चाहिए, तभी बात आगे बढ़ सकती है.

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