सावधान: कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद प्राप्तकर्ता को इन बातों का रखना होगा विशेष ख्याल, जाने यहां

कोरोना वायरस का खात्मा करने के लिए वैक्सीन लगने के बाद प्राप्तकर्ता को 42 दिन तक कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा.

आपको बता दें कि वैक्सीन प्राप्तकर्ता को भीड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करना होगा. इसके अलावा मास्क पहनना होगा, किसी प्रकार के संक्रमण की चपेट में आने से बचना होगा.

ये जानकारी हमे स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने दी है. उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को अगर वैक्सीन लगाई गई है तो उसके 42 दिन तक वैक्सीन लगाने वाले शख्स को एहतियात बरतनी होगी, क्योंकि 42 दिन बाद ही शरीर में एंटीबॉडी बनना शुरू होंगे. आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के भंडारण को लेकर बुधवार को स्वास्थ्य निदेशालय परिमहल कसुम्पटी में स्वास्थ्य अधिकारियों की टीमें जुटी रहीं. गुरुवार को केंद्र सरकार की तरफ से राज्य में कोरोना वैक्सीन मुहैया करा दी गई है. फिलहाल किस सेंटर में कितनी वैक्सीन भेजनी है, टीम इसका रिकॉर्ड तैयार करने में लगी हुई है.

मालूम हो कि देश में दो कोरोना वैक्सीन- Covishield और Covaccine के ईस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है. वहीं, यदि आपको पहले कोविशील्ड का टीका लगाया गया है तो आपको दूसरी वैक्सीन भी कोविशील्ड की दी जाएगी.

इसके अलावा पहली वैक्सीनेशन होने के बाद दूसरा वैक्सीनेशन में 28 दिन का अंतराल रखा जाएगा.

बताते चलें कि राज्य के लिए प्रथम चरण में सीरम इंस्टीट्यूट में बन रहे ऑक्सफोर्ड के टीके ‘कोविशील्ड’ की 93 हजार डोज मंजूर की गई हैं.

मालूम हो कि राज्य में हवाई मार्ग से वैक्सीन पहुंचेगी. हेलीकॉप्टर अनाडेल में उतरेगा, जहां से 12 वातानुकूलित एंबुलेंसों से वैक्सीन 46 सेंटरों तक पहुंचाई जाएगी.

मालूम हो कि स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि सबसे पहले यह टीका 41 हजार डॉक्टरों, नर्सों, सफाई कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों की स्वेच्छा पर लगाया जाएगा.  पहले चरण का टीकाकरण अभियान 10 दिन तक चलेगा और 46 सेंटरों में यह वैक्सीन लगाई जाएगी. वहीं, आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेजों में वेब टेक्नोलॉजी सेंटर होंगे, इन पर पीएमओ की नजर बनाए रखेगी.

स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीका लगाने वाले कोरोना वॉरियर्स से बात भी कर सकते हैं. स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र को प्रदेश के लिए डेढ़ लाख डोज का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने पहले चरण के लिए 93 हजार डोज ही मंजूर दी है.

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