प्रवासियों की उम्मीद बने ‘अर्थव ‘और ‘आद्विक’

बात करीब एक महीना पुरानी है। ज्येष्ठ की दुपहरी में लखनऊ प्रयागराज हाईवे पर भीड़ पैदल चली जा रही थी।कोई सिर पे समान रखे था तो किसी ने बच्चे को खंधे पर बैठा रखा था।कई लोगों के पैरों में चप्पल भी नहीं थी।हाईवे के किनारे मकान में परिवारजन के साथ बालकनी से यह दृश्य देख रहे आद्विक ने मानो इन प्रवासियों का दर्द महसूस कर लिया हो।उनकी बेबसी देख वह बोला पापा आप इन्हे नौकरी क्यूं नहीं दे देते।तो पिता बोले कितनों को काम दे।उसने कहा दूसरों के यहां दिलाइए।तब उसके पापा बोले। कि पता नहीं किसे क्या काम आता है।तभी आद्विक के साथ ही खड़े उसे बड़े भाई अर्थव ने एक रास्ता सुझाया और यहीं से प्रवासियों के पुनर्स्थापना की राह बन गई।अब यह दोनों भाई रोजगार प्रवासियों के लिए उम्मीद बन गए।

दरअसल,रायबरेली जिले के फिरोज गांधी नगर में खुबेले परिवार रहता है।परिवार के मुखिया अविचल खूबेले का बड़ा बेटा अर्थव खूबेले लखनऊ के सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में कक्षा आठ का छात्र है।जबकि छोटा बेटा आद्विक शहर के ही प्रगतिपुराम स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ता है। दोनों ने मिलकर एक ऑनलाइन प्रोजेक्ट तैयार किया है।इसके पीछे उद्देश्य था प्रवासियों को रोजगार उपलब्ध करा कर पुनर्स्थापित किया जाए।इस नाते प्रोजेक्ट का नाम भी’ पुनर्स्थापन ‘ दिया गया।इस प्रोजेक्ट का प्रारूप ये है कि जो प्रवासी जिस काम में पारंगत है,उन्हें उस कार्यस्थल यानि इंडस्ट्री तक पहुंचाना।साथ ही फैक्ट्री मालिकों की सहूलियत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म पर कुशल और अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता हो।इससे दोनों की आवश्यकताएं पूरी होंगी।मगर यह तभी संभव है,जब इसका प्रचार प्रसार हो।इस नाते बच्चे अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इस मुहिम को भी सफल बनाने में जुटे है।

परिवार का रहा पूरा सहयोग :अर्थव और आद्विक के पिता अविचल खुबेलेे न उद्यमी होने के साथ ही रायबरेली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष भी है।बेशक पुनर्स्थापना इन बच्चों की खोज हो।लेकिन,इसके पीछे अविचल और उनके परिवार का बड़ा रोल रहा।सबने मिलकर करीब 40 श्रेणी के उद्योगों से संपर्क किया और इंजीनियर से लेकर रसोइए और ड्राइवर तक की 14-15 स्किल ढूंढ़ कर निकाली।इसके बाद बच्चों ने ऑनलाइन लिंक बनाई।जिसमें सभी स्किल को शामिल किया।

ऐसे काम करती है पुनर्स्थापना : अर्थव का कहना है कि पुनर्स्थापन में श्रमिक और उद्योग का पंजीकरण होता है।श्रमिक को सिर्फ मोबाइल नंबर 9415118418 पर श्रमिक पंजीकरण लिखकर वॉट्सएप पर या टेक्स्ट मैसेज करना है।फिर उसे पुनर्स्थापन की लिंक भेज दी जाएगी।इसे खोलने पर श्रमिक उसमें मांगा गया विवरण भरेगा।जैसे ही श्रमिक सबमिट के विकल्प को छुएगा उसका पंजीकरण हो जाएगा। हा इसके लिए मोबाइल में नेट होना जरूरी है।इसी उद्योगों का भी पंजीकरण होगा।

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